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Saturday, June 11, 2011

एक प्रेमिका का प्रेमी को आत्मनिवेदन

हम दोनों की बस एक ही कहानी हैं
दिल में दर्द और आँखों में पानी हैं

किसी दिन तकदीर करवट बदल गयी थी .
तुझ को अपनाने मेरी बाहे तरस गयी थी
मेरा प्यार ताकत बनकर दिख गया था
तू तब बस मेरे लिए बिक गया था

मेरी आँखों के सपने पूरे करने थे
सांसो में मेरी अपने वादे भरने थे
पागल तुने मेरे लिए ही सारे दुःख उठाये
अरे अपने फूल से सपने भी ठुकराए

फिर भी मुझे ही तसल्ली देता रहा
अपना आप दिया और मेरे दुःख लेता रहा
क्या करू तेरे लिए तू बता तो सही
क्या तू ही तो मेरी सच्ची दुआ नहीं

तेरी एक झलक पर सारी जिंदगी दे दू
परमात्मा कि भक्ति भी तुझे बिन मोल दे दू
क्या तुझसे पवित्र कोई मंदिर हो सकता हैं
ऐसा सरल सा दिल बस मेरा तेरे लिए रो पड़ता हैं

तेरी जिंदगी पता नहीं कब मेरी हो गयी थी
साथ जीना था इसलिए अकेली राहे खो गयी थी
अरे राधाकृष्ण कि जोड़ी जी भी कहाँ इतनी प्यारी होंगी
ऐसी कोमलता कहाँ किसी में न्यारी होंगी

तू बता ना तू क्यों मेरे लिए इतना सह रहा हैं
मुझ लाचार के लिए के लिए तू ऐसे रह रहा हैं
जैसे तो तुने कोई गुनाह कर दिया हो
अपना सब लुटाकर जैसे मुझमे भर दिया हो

मेरा बेटा भी तेरे त्याग कि निशानी हैं
हम तीनो के सच्चे प्यार कि कहानी हैं

जब दुनिया से मेरा विश्वास सा उठ चला था
अतीत कि बातो को लेकर सुना बुरा भला था
फिर एक आलिंगन से तुने जब प्यार दिखाया था
मै सिर्फ तेरी हूँ कितना अधिकार जताया था

फिर मेरा बेटा होने पर तुने दांव लगाया था
मेरी संतान लड़का होना पहले बताया था
मै तभी समझी जब बेटे का जन्म हो गया था
बुरा मेरा सारा दौर बस अब खो गया था

छुट्टियों से आने के बाद मैंने तुम्हारा प्यार देखा
तुम्हारे हाथो में लिखी मिली मेरी जीवन रेखा
तुमने सारे राज खोलकर मुझे अपना बना लिया
मै कोई साधारण नहीं ये सच दिखा दिया

मै मंदिर कि पूजा सी पवित्र एक लड़की हू
तुम्हारी भक्ति कि एक धड़कन लगती हूँ
अब तो रोज़ हमेशा एक स्वर्ग से सपने में आंखे खोलती हू
मेरे प्यार और बेटे दोनों मेरी जिंदगी तुम्हे थैंक्स बोलती हूँ