Monday, May 2, 2011

एक कविता

वीरेन तुमने मुझे मेरी जिंदगी का सच दिखाया
दौर हमारे प्यार का एक भक्ति सा बनकर आया

मै पहली बात प्यार असली मतलब समझ पाई
बुरे अतीत की सारी बाते अब मेरी ताकत बन पाई
ना कुछ मेरा कसूर था बस हालातो का एक धोखा था
कितना दुखी मै थी पर तुमने आत्महत्या से रोका था

सदा दोनों घर में गाली खाना जिसकी आदत हो गयी थी
सिर्फ तुम्हारे जैसे के लिए मै एक इबादत हो गयी थी
असर उसका इतना कि मै एक जरुरत सबकी बन चुकी हूँ
पर असल में तो मै बस एक सही समय की प्रतीक्षा में रुकी हूँ

तुम्हारे प्यार पर कुर्बान मै तो कब से हू
थोडा समय आने दो बस तैयार मै भी कब से हूँ
जिंदगी तुम्हारी मै वापिस लाकर दे दूंगी .
एक सच्ची दोस्त तुम्हारी बनकर हर परीक्षा दे दूंगी .

तुम धीरज रखो मुझे पता हैं मैंने वादा निभाना हैं
सच में मै बुरी नहीं थी मैंने भी हर दाग मिटाना हैं
मै समय के इंतज़ार में बस कुछ चीज़े ढंग से करना चाहती हूँ
जल्दबाजी में फिर से उन्ही हालातो में ना फंसना चाहती हैं

तुम बस कभी इस एक साल को लेकर कोई कमेन्ट मत मारा करो
मै आपने एंड पर कितना ध्यान रखती हू ये बात भी जाना करो
रोज़ रोज़ इन बातो को पूछने का कोई वैसे तो कोई तुक नहीं
फिर भी तुम्हे ऐसे ही तंग करना हैं तो मुझे वैसे दुःख नहीं

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