Monday, May 2, 2011

बेटे से जुडी संवेदना पर एक माँ की कविता

मेरे नोनू अब तो तू बड़ा हो गया हैं
पैरो पर आपने जो खड़ा हो गया हैं

अब मै जानती हू कि तुझे मेरी जरुरत नहीं
सबका साथ हर पल देती हैं कुदरत कही
इसलिए परमात्मा ने तीन और लोग फंसा रखे हैं
तुझसे जोड़कर कुछ सपने इन्होने बना रखे हैं

पर जिसने तुझे जन्म दिया वो किसी और की दुआ हैं
उसी एक साधक ने मेरी आत्मा को ईश्वर बनकर छुआ हैं
इसलिए मेरा प्यारा दिल बस अब उसका हुआ हैं
वो ही सच्चा सौदा नहीं तो जिंदगी जुआ हैं

उसके साथ से सारी खुशिया मेरी कही से वापस आ गयी
पल पल उसकी सच्ची बाते मेरी दुनिया में छा गयी
उसकी पूजा से तेरे जैसा फूल सा बेटा मै पा गयी
छोटी सी नासमझ बच्ची मै अब बन एक माँ गयी

मै अगर प्यारी ना होती तो तू इतना प्यारा क्यों होता
वो एक धर्म विजेता होकर मेरे सामने हारा क्यों होता
मेरी ताकत मुझमे थी पर बेटा उसका साथ होना जरुरी था
मेरी दुनिया तुझमे घूम रही थी पर वो ही तो धुरी था

मै जानती हू कि मेरी प्रार्थना तू नहीं बस वही था
अपनी जिंदगी मुझे देने का फैसला उसका कितना सही था
तेरे रूप में उसने मुझे अपना छोटा रूप बनाया था
क्या खूब एक कुंवारे का बेटा बनकर तू आया था

जिंदगी के रहस्य वो ना बताता तो तेरा होना भी क्या होना था
कद्र मेरी जिसने मुझे सिखाई उसको तो मैंने कभी ना खोना था
तुम दोनों को एक साथ पाया जैसे मेरा भगवान जग गया हो
सच्ची भावनाए मेरी ऐसी जैसे तुम दोनों से प्रेम रोग लग गया हो

मै जानती ही ना थी कि जिंदगी इतना मेहरबान मुझ पर हो सकती हैं
रूठ गयी मेरी किस्मत पर अब जैसे वो महारानी हो गयी लगती हैं
सांसे सांसे मेरी जैसे मुझे पवित्रता और भक्ति में खो गयी लगती हैं
मेरे नोनू अब मासूम गुडिया तेरे ही किसी अपने की हो गयी लगती हैं

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